The aim of The Hindu Today is to preserve Sanatan Dharma, promote its thinking and principles. The Hindu Today will provide its readers and listeners with a deep and profound understanding of Sanatan
अनोखी बात: उस समय जब पत्थर के मंदिर बनते थे, तब इसे केवल ईंटों और मिट्टी के गारे (Mud Mortar) से बनाया गया था। बिना सीमेंट के यह मंदिर 1500 साल से आंधी-तूफान झेल रहा है।
अगर आप एक ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जहाँ मंदिर भी हो, खूबसूरत बगीचे भी हों और परिवार के साथ पिकनिक मनाने जैसा माहौल भी हो, तो सुधांशु जी महाराज का आश्रम (आनंद धाम) आपके लिए ही है।
कल्पना कीजिए एक ऐसे मंदिर की जहाँ फर्श से लेकर छत तक, और खंभों से लेकर दीवारों तक—सब कुछ कांच और आईने (Mirrors) से बना हो। कानपुर के माहेश्वरी मोहाल में स्थित जैन कांच का मंदिर ऐसा ही एक अजूबा है।
कानपुर के वीआईपी रोड और मॉल रोड के पास स्थित खेरेपति मंदिर (Kherepati Temple) वह जगह है जहाँ शहर के बड़े-बड़े अधिकारी और आम नागरिक दोनों ही सिर झुकाते हैं।
क्या आप कानपुर की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ पल शांति के बिताना चाहते हैं? अगर हाँ, तो कानपुर के ये दो मंदिर न केवल आपकी आस्था को बढ़ाएंगे, बल्कि अपनी वास्तुकला (Architecture) से आपका मन मोह लेंगे। आज
कानपुर के लोगों की सुबह 'जय भोलेनाथ' और 'जय बजरंगबली' के बिना शुरू नहीं होती। आज हम आपको ले चलेंगे कानपुर के दो सबसे प्राचीन और सिद्ध मंदिरों में - परमट (बाबा आनंदेश्वर) और पनकी हनुमान मंदिर।
क्या आप जानते हैं कि पूरी सृष्टि की रचना कहाँ से शुरू हुई थी? पौराणिक कथाओं के अनुसार, वह जगह कानपुर का बिठूर (Bithoor) है। शहर के शोर से दूर, गंगा किनारे बसा बिठूर हिंदू धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल
बनारस और हरिद्वार की तरह, कानपुर में भी गंगा का एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। यहाँ के घाट न केवल आस्था का केंद्र हैं, बल्कि शाम को सुकून पाने की सबसे अच्छी जगह भी हैं।
The aim of The Hindu Today is to preserve Sanatan Dharma, promote its thinking and principles. The Hindu Today will provide its readers and listeners with a deep and profound understanding of Sanatan
अनोखी बात: उस समय जब पत्थर के मंदिर बनते थे, तब इसे केवल ईंटों और मिट्टी के गारे (Mud Mortar) से बनाया गया था। बिना सीमेंट के यह मंदिर 1500 साल से आंधी-तूफान झेल रहा है।
अगर आप एक ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जहाँ मंदिर भी हो, खूबसूरत बगीचे भी हों और परिवार के साथ पिकनिक मनाने जैसा माहौल भी हो, तो सुधांशु जी महाराज का आश्रम (आनंद धाम) आपके लिए ही है।
कल्पना कीजिए एक ऐसे मंदिर की जहाँ फर्श से लेकर छत तक, और खंभों से लेकर दीवारों तक—सब कुछ कांच और आईने (Mirrors) से बना हो। कानपुर के माहेश्वरी मोहाल में स्थित जैन कांच का मंदिर ऐसा ही एक अजूबा है।
कानपुर के वीआईपी रोड और मॉल रोड के पास स्थित खेरेपति मंदिर (Kherepati Temple) वह जगह है जहाँ शहर के बड़े-बड़े अधिकारी और आम नागरिक दोनों ही सिर झुकाते हैं।
क्या आप कानपुर की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ पल शांति के बिताना चाहते हैं? अगर हाँ, तो कानपुर के ये दो मंदिर न केवल आपकी आस्था को बढ़ाएंगे, बल्कि अपनी वास्तुकला (Architecture) से आपका मन मोह लेंगे। आज
कानपुर के लोगों की सुबह 'जय भोलेनाथ' और 'जय बजरंगबली' के बिना शुरू नहीं होती। आज हम आपको ले चलेंगे कानपुर के दो सबसे प्राचीन और सिद्ध मंदिरों में - परमट (बाबा आनंदेश्वर) और पनकी हनुमान मंदिर।
क्या आप जानते हैं कि पूरी सृष्टि की रचना कहाँ से शुरू हुई थी? पौराणिक कथाओं के अनुसार, वह जगह कानपुर का बिठूर (Bithoor) है। शहर के शोर से दूर, गंगा किनारे बसा बिठूर हिंदू धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल
बनारस और हरिद्वार की तरह, कानपुर में भी गंगा का एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। यहाँ के घाट न केवल आस्था का केंद्र हैं, बल्कि शाम को सुकून पाने की सबसे अच्छी जगह भी हैं।
The aim of The Hindu Today is to preserve Sanatan Dharma, promote its thinking and principles. The Hindu Today will provide its readers and listeners with a deep and profound understanding of Sanatan
अनोखी बात: उस समय जब पत्थर के मंदिर बनते थे, तब इसे केवल ईंटों और मिट्टी के गारे (Mud Mortar) से बनाया गया था। बिना सीमेंट के यह मंदिर 1500 साल से आंधी-तूफान झेल रहा है।
अगर आप एक ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जहाँ मंदिर भी हो, खूबसूरत बगीचे भी हों और परिवार के साथ पिकनिक मनाने जैसा माहौल भी हो, तो सुधांशु जी महाराज का आश्रम (आनंद धाम) आपके लिए ही है।
कल्पना कीजिए एक ऐसे मंदिर की जहाँ फर्श से लेकर छत तक, और खंभों से लेकर दीवारों तक—सब कुछ कांच और आईने (Mirrors) से बना हो। कानपुर के माहेश्वरी मोहाल में स्थित जैन कांच का मंदिर ऐसा ही एक अजूबा है।
कानपुर के वीआईपी रोड और मॉल रोड के पास स्थित खेरेपति मंदिर (Kherepati Temple) वह जगह है जहाँ शहर के बड़े-बड़े अधिकारी और आम नागरिक दोनों ही सिर झुकाते हैं।
क्या आप कानपुर की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ पल शांति के बिताना चाहते हैं? अगर हाँ, तो कानपुर के ये दो मंदिर न केवल आपकी आस्था को बढ़ाएंगे, बल्कि अपनी वास्तुकला (Architecture) से आपका मन मोह लेंगे। आज
कानपुर के लोगों की सुबह 'जय भोलेनाथ' और 'जय बजरंगबली' के बिना शुरू नहीं होती। आज हम आपको ले चलेंगे कानपुर के दो सबसे प्राचीन और सिद्ध मंदिरों में - परमट (बाबा आनंदेश्वर) और पनकी हनुमान मंदिर।
क्या आप जानते हैं कि पूरी सृष्टि की रचना कहाँ से शुरू हुई थी? पौराणिक कथाओं के अनुसार, वह जगह कानपुर का बिठूर (Bithoor) है। शहर के शोर से दूर, गंगा किनारे बसा बिठूर हिंदू धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल
बनारस और हरिद्वार की तरह, कानपुर में भी गंगा का एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। यहाँ के घाट न केवल आस्था का केंद्र हैं, बल्कि शाम को सुकून पाने की सबसे अच्छी जगह भी हैं।
The protestors demanded immediate action from both the Indian and Bangladeshi authorities to ensure the safety and rights of the Hindu community abroad. They emphasized solidarity with the victims and called for stronger measures to prevent such inci...
The convocation concluded on an uplifting note with blessings, inspiration, and a collective sense of purpose — uniting academic achievement with spiritual growth.
कानपुर जाने का सबसे अच्छा समय सर्दियों में अक्टूबर से मार्च तक है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है। गर्मियां (अप्रैल से जून) बहुत गर्म होती हैं और तापमान अक्सर 40°C से ऊपर चला जाता है।
कानपुर मुख्य रूप से अपने विशाल चमड़ा उद्योग (tanning and manufacturing) के कारण "लेदर सिटी ऑफ द वर्ल्ड" (Leather City) के रूप में जाना जाता है। 1857 की क्रांति में अपनी भूमिका के कारण इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। इसके अलावा, कपड़ा उद्योग के समृद्ध इतिह...
The convocation concluded on an uplifting note with blessings, inspiration, and a collective sense of purpose — uniting academic achievement with spiritual growth.
Dignitaries also visited ‘Jnanam-Vijnanam-Tantram” exhibition, to encourage creativity amongst students of various colleges/Universities, which was inaugurated previous day.
The protestors demanded immediate action from both the Indian and Bangladeshi authorities to ensure the safety and rights of the Hindu community abroad. They emphasized solidarity with the victims and called for stronger measures to prevent such inci...
The protestors demanded immediate action from both the Indian and Bangladeshi authorities to ensure the safety and rights of the Hindu community abroad. They emphasized solidarity with the victims and called for stronger measures to prevent such inci...
Dignitaries also visited ‘Jnanam-Vijnanam-Tantram” exhibition, to encourage creativity amongst students of various colleges/Universities, which was inaugurated previous day.
The convocation concluded on an uplifting note with blessings, inspiration, and a collective sense of purpose — uniting academic achievement with spiritual growth.
कानपुर मुख्य रूप से अपने विशाल चमड़ा उद्योग (tanning and manufacturing) के कारण "लेदर सिटी ऑफ द वर्ल्ड" (Leather City) के रूप में जाना जाता है। 1857 की क्रांति में अपनी भूमिका के कारण इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। इसके अलावा, कपड़ा उद्योग के समृद्ध इतिह...
कानपुर जाने का सबसे अच्छा समय सर्दियों में अक्टूबर से मार्च तक है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है। गर्मियां (अप्रैल से जून) बहुत गर्म होती हैं और तापमान अक्सर 40°C से ऊपर चला जाता है।
हाँ, कानपुर पर्यटकों के लिए सामान्यतः सुरक्षित है। हालांकि, किसी भी बड़े शहर की तरह, रात में सुनसान इलाकों से बचने और भीड़भाड़ वाले बाजारों में अपने सामान का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
पर्यटन और दर्शनीय स्थल (Tourism & Sightseeing)
कानपुर जाने का सबसे अच्छा समय सर्दियों में अक्टूबर से मार्च तक है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है। गर्मियां (अप्रैल से जून) बहुत गर्म होती हैं और तापमान अक्सर 40°C से ऊपर चला जाता है।
कानपुर मुख्य रूप से अपने विशाल चमड़ा उद्योग (tanning and manufacturing) के कारण "लेदर सिटी ऑफ द वर्ल्ड" (Leather City) के रूप में जाना जाता है। 1857 की क्रांति में अपनी भूमिका के कारण इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। इसके अलावा, कपड़ा उद्योग के समृद्ध इतिह
The convocation concluded on an uplifting note with blessings, inspiration, and a collective sense of purpose — uniting academic achievement with spiritual growth.
Dignitaries also visited ‘Jnanam-Vijnanam-Tantram” exhibition, to encourage creativity amongst students of various colleges/Universities, which was inaugurated previous day.
The protestors demanded immediate action from both the Indian and Bangladeshi authorities to ensure the safety and rights of the Hindu community abroad. They emphasized solidarity with the victims and called for stronger measures to prevent such inci
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