श्राद्ध पक्ष शुरू, गया कोठा तीर्थ पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

श्राद्ध पक्ष शुरू गया कोठा तीर्थ पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़


पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए तर्पण और पिंडदान का सिलसिला शुरू

उज्जैन। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का पर्व श्राद्ध पक्ष शुरू हो गया है। इसी के साथ उज्जैन के अंकपात क्षेत्र स्थित गया कोठा तीर्थ और सप्तऋषि मंदिर में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

पूर्णिमा तिथि पर सुबह से ही गया कोठा स्थित सप्तऋषि मंदिर में शहर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। श्रद्धालुओं ने सप्तऋषियों का पूजन कर दूध और जल अर्पित किया तथा अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान किया।

श्रीकृष्ण से जुड़ी है धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार अंकपात स्थित गया कोठा तीर्थ का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और उनके गुरु सांदीपनि से जुड़ा है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि के पुत्रों के निमित्त यहां तर्पण किया था। इसी वजह से श्राद्ध पक्ष में गया कोठा तीर्थ पर पितृ कर्म करने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

तीर्थ परिसर में भगवान विष्णु के 16 चरण और सप्तऋषि मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

श्राद्ध पक्ष के दौरान उज्जैन में देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। लोग अपने पूर्वजों की स्मृति में उनकी तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन कर्मों के माध्यम से पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित की जाती है।

पुरोहितों की पोथियों में दर्ज हैं कई पीढ़ियों के नाम

गया कोठा सहित उज्जैन के तीर्थ पुरोहितों के पास कई परिवारों से जुड़ी पुरानी वंशावली पोथियां भी उपलब्ध हैं। इनमें परिवारों की कई पीढ़ियों और पूर्वजों के नाम दर्ज होने की बात कही जाती है। श्राद्ध कर्म के दौरान इन पोथियों से पूर्वजों की जानकारी प्राप्त करने में श्रद्धालुओं को सहायता मिलती है।

शासकीय तीर्थ पुरोहित आनंद जोशी ‘लोटा गुरु’ के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में परिजन अपने पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म और पूजन करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।