भारतीय राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल किसी पद से नहीं, बल्कि उनके लंबे राजनीतिक सफर, संगठनात्मक अनुभव और जनसंपर्क से बनती है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी ऐसे ही नेताओं में शामिल हैं. छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले डॉ. यादव आज प्रदेश के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंच चुके हैं.
13 दिसंबर 2023 को उन्होंने मध्य प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें ऐसे समय में मुख्यमंत्री चुना, जब विधानसभा चुनाव में पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला था. उनकी नियुक्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा संगठन में लंबे समय से काम करने वाले नेताओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है.
उज्जैन की धरती से शुरू हुआ सफर
डॉ. मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को मध्य प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक शहर उज्जैन में हुआ. प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने विज्ञान, कानून, प्रबंधन और राजनीति विज्ञान जैसे अलग-अलग विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने बी.एससी., एलएलबी., एमबीए., एम.ए. और राजनीति विज्ञान में पीएचडी की डिग्री हासिल की. इसी कारण उन्हें देश के सबसे शिक्षित मुख्यमंत्रियों में भी गिना जाता है.
छात्र राजनीति से मिली पहली पहचान
राजनीतिक जीवन की शुरुआत कॉलेज के दिनों से हुई. उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में सक्रिय भूमिका निभाई.
प्रदेश मंत्री से लेकर राष्ट्रीय मंत्री तक संगठन में कई जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई. यही संगठनात्मक अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक यात्रा की मजबूत नींव बना.
लगातार तीन बार विधायक बने
डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से चुनावी राजनीति में प्रवेश किया.
2013 में पहली बार विधायक चुने गए.
2018 में दूसरी बार जीत दर्ज की.
2023 में लगातार तीसरी बार जनता ने उन्हें विधानसभा भेजा.
लगातार तीन चुनावों में मिली जीत ने उन्हें मालवा क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में स्थापित किया.
उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में निभाई अहम जिम्मेदारी
जुलाई 2020 में शिवराज सिंह चौहान सरकार में उन्हें पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाया गया. उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई प्रशासनिक फैसलों पर काम किया.
पर्यटन और संस्कृति से भी रहा गहरा जुड़ाव
मुख्यमंत्री बनने से पहले डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष भी रहे. इस दौरान उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला. पर्यटन क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति स्तर पर सम्मान भी मिल चुका है. उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने शहर के विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी काम किया.
विक्रमादित्य शोधपीठ की स्थापना में निभाई भूमिका
उज्जैन भारतीय इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य शोधपीठ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसका उद्देश्य सम्राट विक्रमादित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा पर शोध को बढ़ावा देना था.
खेल और सामाजिक संगठनों में भी सक्रिय रहे
राजनीति के अलावा वे कई सामाजिक और खेल संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं.
भारत स्काउट्स एंड गाइड्स (उज्जैन) के जिला अध्यक्ष.
मध्य प्रदेश ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष.
विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी.
ओबीसी नेतृत्व का प्रमुख चेहरा
डॉ. मोहन यादव को भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख ओबीसी नेताओं में माना जाता है. मालवा क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़, संगठनात्मक अनुभव और लंबे राजनीतिक सफर ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया.
मुख्यमंत्री बनने के बाद नई जिम्मेदारी
13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सामने निवेश, रोजगार, बुनियादी ढांचा, कृषि, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां हैं.
एक नजर में डॉ. मोहन यादव
पूरा नाम: डॉ. मोहन यादव
जन्म: 25 मार्च 1965
जन्मस्थान: उज्जैन, मध्य प्रदेश
शिक्षा: B.Sc., LLB, MBA, M.A., Ph.D. (राजनीति विज्ञान)
राजनीतिक दल: भारतीय जनता पार्टी
विधानसभा क्षेत्र: उज्जैन दक्षिण
पहली बार विधायक: 2013
मंत्री पद: उच्च शिक्षा मंत्री (2020)
मुख्यमंत्री: 13 दिसंबर 2023 से मध्य प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री
विशेष पहचान: शिक्षाविद, संगठनकर्ता और ओबीसी नेतृत्व का प्रमुख चेहरा