श्वेत वाराह जी महाराज का ज्येष्ठाभिषेक संपन्न, स्नान यात्रा में दिव्य अभिषेक और आम्रफल का भोग


ब्रज चौरासी कोस के प्रधान देव ठाकुर श्री श्वेत वाराह जी महाराज के मंदिर में विक्रमी संवत 2083 के आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी (आ. कृ. 13) के अवसर पर सोमवार को ज्येष्ठाभिषेक का आयोजन श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान के दिव्य दर्शन किए और पूजा-अर्चना में भाग लिया.

स्नान यात्रा के अंतर्गत प्रातःकाल ठाकुर श्री श्वेत वाराह जी महाराज का शीतल अधिवास के पवित्र जल से दिव्य अभिषेक कराया गया. वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुए इस अभिषेक ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया.

आम्रफल का विशेष भोग अर्पित

अभिषेक के बाद भगवान को ऋतु के अनुरूप आम्रफल (आम) का विशेष भोग अर्पित किया गया. परंपरा के अनुसार भोग समर्पित करने के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया. राजभोग दर्शन के दौरान ठाकुर श्री श्वेत वाराह जी महाराज ने धोती और उपरना धारण कर भक्तों को मनोहारी स्वरूप में दर्शन दिए. भगवान के इस दिव्य श्रृंगार ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और भक्तों ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की.

स्नान यात्रा और ज्येष्ठाभिषेक का धार्मिक महत्व

मंदिर में दिनभर दर्शन और पूजा का क्रम चलता रहा. श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और लोककल्याण की कामना करते हुए भगवान के चरणों में प्रार्थना अर्पित की. धर्मिक मान्यता के अनुसार स्नान यात्रा और ज्येष्ठाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है. इस अवसर पर भगवान का शीतल जल से अभिषेक कर उन्हें ग्रीष्म ऋतु में शीतलता प्रदान करने की परंपरा का पालन किया जाता है.

मंदिर प्रशासन ने बताया कि आगामी धार्मिक आयोजनों में भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी. पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से ओतप्रोत रहा.