अयोध्या के 'राम' का किरदार निभाने वाले मेरठ के सांसद अरुण गोविल की कहानी
अयोध्या के राम का किरदार निभाने वाले मेरठ के सांसद की कहानी

अयोध्या के 'राम' का किरदार निभाने वाले मेरठ के सांसद अरुण गोविल की कहानी

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Meerut , Uttar Pradesh
(India)
अयोध्या के राम का किरदार निभाने वाले मेरठ के सांसद की कहानी

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श्रेणी: General | लेखक : | दिनांक : 09-Jun-26 02:33:46 AM

आपको याद होगा कि जब रात के समय घड़ी के ठीक नौ बज जाते थे तो जिनके घर में टीवी हुआ करती थी उनके घर में रामायण देखने की भीड़ भी हुआ करती थी आज के इस कहानी में हम उसी राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल जो कि वर्तमान समय में मेरठ के सांसद हैं तो आइए इस पर एक नजर डालते हैं...

मेरठ की राजनीति में आज जिस चेहरे की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, वह सिर्फ एक सांसद नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की स्मृतियों में बसे 'भगवान राम' भी हैं. टीवी स्क्रीन पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले अरुण गोविल ने अभिनय की दुनिया से निकलकर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंच संसद तक का सफर तय किया है.

2024 के लोकसभा चुनाव में मेरठ से जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू किया. लेकिन उनकी कहानी केवल राजनीति की नहीं, बल्कि संघर्ष, लोकप्रियता, आस्था और जनसेवा के अनोखे संगम की कहानी है.

अरुण गोविल- रामायण के राम से मेरठ के सांसद बनने तक का सफर

मेरठ की धरती ने कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक चेहरे देश को दिए हैं, लेकिन अरुण गोविल का नाम उन व्यक्तित्वों में शामिल है जिन्होंने पहले अभिनय की दुनिया में अमिट छाप छोड़ी और फिर राजनीति में कदम रखकर जनता का विश्वास जीता. रामानंद सागर की ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल आज मेरठ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.


मेरठ में जन्म, यहीं से शुरू हुई कहानी

अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी 1952 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ था. उनका परिवार व्यवसाय से जुड़ा हुआ था और बचपन से ही उनका अधिकांश समय मेरठ में बीता. पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार के व्यवसाय से जुड़ने की उम्मीद थी, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था. मेरठ की गलियों से निकलकर वह मुंबई पहुंचे, जहां उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया.

जब कारोबार छोड़ चुना अभिनय का रास्ता

1975 में अरुण गोविल अपने भाई के व्यवसाय में हाथ बंटाने के लिए मुंबई गए. हालांकि, जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि उनका मन व्यापार में नहीं लगता. कॉलेज के दिनों में नाटकों में हिस्सा लेने का अनुभव उनके अंदर छिपे कलाकार को लगातार आवाज दे रहा था. इसी दौरान उनकी मुलाकात मशहूर अभिनेत्री तबस्सुम के माध्यम से फिल्म निर्माता ताराचंद बड़जात्या से हुई. यहीं से उनके फिल्मी करियर की शुरुआत हुई.

पहली फिल्म और रातों-रात मिली पहचान

1977 में आई फिल्म पहेली अरुण गोविल की पहली बड़ी फिल्म थी. इसके बाद सावन को आने दो, सांच को आंच नहीं और राधा और सीता जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का उभरता सितारा बना दिया. विशेष रूप से सावन को आने दो और सांच को आंच नहीं बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं और अरुण गोविल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ने लगी.

रामायण ने बदल दी जिंदगी

1980 के दशक में रामानंद सागर एक ऐसा चेहरा तलाश रहे थे जो भगवान राम के चरित्र को जीवंत कर सके. जब अरुण गोविल को यह भूमिका मिली, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह किरदार उन्हें अमर बना देगा.

1987 में प्रसारित हुई रामायण ने भारतीय टेलीविजन का इतिहास बदल दिया. अरुण गोविल ने भगवान राम का ऐसा प्रभावशाली अभिनय किया कि लोग उन्हें वास्तविक जीवन में भी राम के रूप में देखने लगे. देशभर में उनके प्रति श्रद्धा का भाव इतना बढ़ गया कि लोग उनके पैर छूने लगे और उन्हें भगवान राम का स्वरूप मानने लगे.

राम की छवि से मिली नई पहचान

रामायण की सफलता के बाद अरुण गोविल केवल अभिनेता नहीं रहे, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गए. उन्होंने बाद में लव-कुश, जय वीर हनुमान, विश्वामित्र और बुद्धा जैसे धारावाहिकों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं. 1993 की जापान-भारत संयुक्त एनिमेटेड फिल्म रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस राम में उन्होंने भगवान राम को अपनी आवाज भी दी.



परिवार और निजी जीवन

अरुण गोविल का विवाह अभिनेत्री और टेक्सटाइल डिजाइनर श्रीलेखा गोविल से हुआ. उनके दो बच्चे हैं- सोनिका और अमल. परिवार के प्रति उनका जुड़ाव हमेशा मजबूत रहा है और अभिनय के व्यस्त जीवन के बावजूद उन्होंने निजी जीवन को संतुलित रखा.

राजनीति में एंट्री कैसे हुई?

कई दशकों तक सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहने के बाद अरुण गोविल ने 18 मार्च 2021 को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की और संगठन के साथ लगातार जुड़े रहे.

मेरठ से मिला चुनावी टिकट

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें मेरठ लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया. यह सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है. चुनाव प्रचार के दौरान अरुण गोविल ने अपने सांस्कृतिक प्रभाव, सरल व्यक्तित्व और भाजपा संगठन की ताकत के सहारे जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई.

पहली बार बने सांसद

4 जून 2024 को घोषित परिणामों में अरुण गोविल ने मेरठ लोकसभा सीट से जीत दर्ज की और पहली बार संसद पहुंचे. उनकी जीत केवल राजनीतिक सफलता नहीं थी, बल्कि यह उस लोकप्रियता का भी प्रमाण थी जो दशकों बाद भी लोगों के दिलों में कायम है.

सांसद बनने के बाद किन मुद्दों पर फोकस?

सांसद बनने के बाद अरुण गोविल ने मेरठ के विकास से जुड़े कई मुद्दों को प्राथमिकता दी है.

उनके प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं-

रेलवे और परिवहन सुविधाओं का विस्तार

औद्योगिक विकास

स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण

रोजगार के अवसर बढ़ाना

मेरठ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना

मेरठ के लिए क्या है उनका विजन?

अरुण गोविल अक्सर कहते हैं कि मेरठ केवल खेल उद्योग या 1857 की क्रांति का शहर नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक राजधानी बनने की क्षमता रखता है. उनका मानना है कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और सांस्कृतिक विरासत को जोड़कर मेरठ को नई पहचान दी जा सकती है.

अभिनेता, आस्था का प्रतीक और अब जनप्रतिनिधि

अरुण गोविल का जीवन इस बात का उदाहरण है कि लोकप्रियता को जनसेवा में कैसे बदला जा सकता है. मेरठ की धरती से निकला एक युवक पहले फिल्मी पर्दे पर राम बना, फिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक बना और आज लोकतंत्र के मंदिर संसद में मेरठ की आवाज बनकर खड़ा है. उनकी कहानी केवल एक अभिनेता या राजनेता की नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की कहानी है जिसने समय के साथ अपनी भूमिका बदली, लेकिन लोगों के दिलों में अपनी जगह हमेशा बनाए रखी.