भगवान श्रीराम केवल भारत की आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन, आदर्शों और रामायण की गूंज दुनिया के अनेक देशों में सुनाई देती है. भारत में रामायण को धार्मिक ग्रंथ के रूप में सम्मान प्राप्त है, लेकिन इसके प्रभाव की सीमाएं केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं रहीं. दक्षिण-पूर्व एशिया के मंदिरों, राजमहलों और शिलालेखों से लेकर कैरेबियाई देशों और दक्षिण अमेरिका तक रामकथा के अनेक सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण देखने को मिलते हैं.
‘द हिंदू टुडे’ की इस विशेष प्रस्तुति में हम जानेंगे कि कैसे श्रीराम के आदर्श और रामायण की कथा हजारों किलोमीटर दूर स्थित देशों की संस्कृति, परंपराओं, स्थापत्य कला और लोकजीवन का हिस्सा बन गई. अयोध्या शोध संस्थान के पूर्व निदेशक वाई.पी. सिंह के अनुसार, रामायण केवल एक धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि मानव मूल्यों की ऐसी धरोहर है जिसने विभिन्न सभ्यताओं को प्रभावित किया है.
इंडोनेशिया, थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस, वियतनाम, फिलीपींस और अन्य देशों में आज भी रामायण पर आधारित नृत्य, नाटक, मंदिरों की भित्तिचित्र कला और सांस्कृतिक परंपराएं जीवित हैं. वहीं कई स्थानों के नाम, राजवंशों की परंपराएं और स्थानीय मान्यताएं भी रामकथा से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं.